नमस्कार मित्रो, आपका दीप पंजाबी एक बार फेर आपकी सेवा में गरमा गर्म कहानी लेकर हाज़िर है। इतना तो जरूर पता है मुझे के अपने बारे में बताने की जरूरत नही है। सब दोस्त जानते ही हो।
सो ज्यादा समय न खराब करते हुए सीधा आज की कहानी पे आते है।
आज की कहानी मेरे हीे एक खास दोस्त की आपबीती है। तो चलिये सुनते है आगे की कहानी उसी की ही ज़ुबानी।
हलो दोस्तों मेरा नाम प्रदीप सिंह है। मैं पंजाब का ही रहने वाला हूँ और एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ता हूँ। मेरी उम्र 25 वर्ष के लगभग है। मेरी आज की कहानी मेरे और मेरी अंधी पड़ोसन के बारे में है। थोडा प्राइवेसी का ध्यान रखते हुए उसका नाम बदल रहा हूँ।
हुआ ऐसे की मेरे घर के बिलकुल सामने मेरे पड़ोसी राम सिंह का घर है। काफी साल पहले उनका तो निधन हो गया है। अब परिवार में उसकी बीवी और उसके 2 बच्चे रहते है। जिसमे बड़ी बेटी रजनी जो जन्म से ही अंधी है। उसकी उम्र यही कोई 35 वर्ष होगी और छोटा बेटा रवि जो 20 वर्ष का है और अभी पढ़ रहा है।
अब हमारी कहानी की नायिका यानि रजनी के बारे में बतादू। हुआ यूं के रजनी के अंधी होने की वजह से उसकी शादी 25 वर्ष की आयु में ही एक उससे भी बड़ी उम्र के बूढ़े से दिखने वाले एक आदमी से हुई थी। घर वालो को भी ये था के किसी न किसी तरह से बेटी का घर बस जाये। वरना अंधी को कौन अपने घर की बहु बनायेगा।
अभी कुछ ही साल हुए होंगे शादी को के उसके पति का निधन हो गया। वो अपने मायके में आकर रहने लगी। घर वालो ने फेर एक नया घर उसकी शादी के लिए तलाशा। इस बार भी उसकी किस्मत धोखा दे गयी।
उसका नया कोई पति काम काज नही करता था, वहां थोडा समय रहने के बाद वो सब छोड़छाड़ कर अपने मायके में आ गयी। अब वो उदास उदास सी रहने लगी और पड़ोसी होने के नाते सोटी के सहारे हमारे घर आ जाती थी और माँ से बातें करके अपना दुःख बाँट लेती थी। एक दिन माँ बाज़ार और पापा अपने काम पे गए हुए थे।
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