मौसा से मेरी दोस्ती हो गयी, उनको मैं सिनेमा ले गयी जहां मैंने पहली बार उनका लंड चूसा. और अब बारी थी मेरी कुंवारी चूत में मौसा का लंड लेने की. मेरी तमन्ना कैसे पूरी हुई?
दोस्तो, मैं कल्पना रॉय अपनी फैमिली सेक्स स्टोरी का दूसरा भाग लायी हूं. इस कहानी पहले भागमेरी अन्तर्वासना और मौसा से चुदाई-1में मैंने आपको बताया था कि कैसे मैं गांव से शहर में पढ़ाई करने के लिए आई थी.
शहर में मौसी के घर रहते हुए मेरा दिल मौसा पर आ गया था. चढ़ती जवानी में चूत की गर्मी मौसा के लंड का पानी मांग रही थी. मैं पहले ही मन ही मन मौसा को पति मान चुकी थी. अब बस कोशिश थी मौसा के अंदर मेरे लिये भावनाएं पैदा करने की.
उसके लिए सिनेमा हॉल अच्छा विकल्प था. मैं मौसा को फिल्म देखने के बहाने ले गयी. उस दिन मैंने सोच लिया था कि अगर आज मौसा को पटा नहीं पाई तो फिर कभी न हो पायेगा.
सिनेमा हॉल में अब मेरे पास तीन घंटे थे. इस दरम्यान मुझे मौसा को किसी भी प्रकार खुश करना था. सीट पर बैठते ही मैंने मौसा का हाथ पकड़ कर मेरी टी शर्ट के अन्दर कर लिया.
मैंने मौसा के हाथ में बूब्स पकड़ा दिए और मुंह मौसा के नजदीक ले जाकर बायें हाथ से मौसा का चेहरा पकड़ होंठ से होंठ मिला कर चुंबन लेने लगी. मौसा मुझे पीछे हटाते रहे मगर मैं बार बार उनको छेड़ती रही.
कुछ देर की आना-कानी के बाद वो ढीले पड़ गये और मैंने इसी पल का फायदा उठा कर मौसा की पैंट की चेन को खोल दिया. उनका लौड़ा अंदर तना हुआ था जिसको मैं जिप से बाहर निकालने की कोशिश करने लगी. मगर लंड बाहर नहीं निकल पा रहा था मुझसे.
तब मौसा ने अपने हाथ से लंड बाहर निकाला. जैसे ही मैंने हाथ में लंड लिया उसका आकार ऐसा था कि वो मेरे हाथ की गोलाई में समा नहीं रहा था. …