आपने अब तक मेरी इस सेक्स कहानी के पिछले भागपुराने साथी के साथ सेक्स-4में पढ़ा कि सुरेश में मुझे इतना अधिक चोदा था कि मैं खुद को निष्प्राण समझने लगी थी. सुरेश की इस ताबड़तोड़ चुदाई से मैं फट पड़ी और भलभला कर झड़ने लगी.
अब आगे:
सुरेश समझ गया कि मैं झड़ गयी हूँ इसलिए उसने मुझसे कहा- पानी निकल गया तुम्हारा?मैंने भी जवाब में सिर हिला दिया.वो मेरे ऊपर से आहिस्ते आहिस्ते उठा और मुझे अपने ऊपर आने को बोला.
मैं उसके ऊपर बैठ गयी और लिंग योनि में प्रवेश करा धक्के लगाने लगी. सुरेश ने कहा- आराम आराम से धीरे धीरे धक्के लगाना.
मैं उसके कहे अनुसार हल्के हल्के से अपनी कमर हिला हिला कर लिंग को अपनी योनि से घर्षण देने लगी. वो एकदम मस्ती में आ गया और औरतें की भांति कराहने लगा. वो इतने जोश में आ गया था कि दोनों हाथों से मेरे स्तनों को बेरहमी से ऐसे मसलने लगा कि बूंद बूंद करके मेरे चूचुकों से दूध टपकने लगा.
अब मेरी भी खुमारी फिर से बढ़ने लगी और मैं अपनी योनि से तरल रिसता हुआ महसूस होने लगी.मैं भी अब सम्भोग के मजे से सिसकने लगी थी और उसके सीने पर अपनी नाखून गड़ाते हुए तेज़ी से धक्के मारने लगी. मैं फिर से …