This story is part of the Padosan bani dulhan series
जेठजी अपनी हवस की ज्वाला में उन्मत्त, जल्दी से माया के ब्लाउज के बटनों को खोल कर माया के ब्लाउज को निकाल दिया। उसके फ़ौरन बाद उन्होंने ब्रा के हुक भी खोल दिए और माया की उद्दंड चूँचियों को ब्रा के बंधन से आझाद कर दिया।
शायद जेठजी ने उससे पहले किताबों, फोटो और वीडियो को छोड़ किसी भी औरत की नंगी चूँचियाँ प्रत्यक्ष नहीं देखीं होंगी। माया के उद्दंड स्तनों को देख कर जेठजी की आँखें फ़टी की फ़टी रह गयीं। ब्लाउज को पहने हुए माया की छाती का जो आकर्षक उभार जेठजी ने पहले देखा था वही स्तनोँ को उस रात नंगे देख कर जेठजी अपनी आँखों पर विश्वास नहीं कर पाए।
माया के गोरे चिकने स्तन उसकी छाती के ऊपर गुरुत्वाकर्षण के नियम की खिल्ली उड़ाते हुए निचे सपाट होने के बजाये फुले हुए दो छोटे टीले जैसे श्यामल एरोला से घिरे हुए दो उद्दंड निप्पलों का शिखर बनाये हुए ऐसे कामुक लग रहे थे की जेठजी को अपने आप पर गर्व महसूस हुआ की माया …