आपने अब तक इस गांडू कहानी के प्रथम भागगांडू मास्टर साहब और दो चेले-1में पढ़ा कि मास्टर साहब के लंड और उनके दो शिकारों की छिली हुई गांड का इलाज करने के बाद मास्टर साहब मुझे फुसला रहे थे कि किसी तरह से मेरा अहसान उन पर से उतर जाए.
अब आगे..
मैंने सीधे मतलब की बात पर आते हुए कहा- मास्टर साहब … आप भी बहुत हट्टे-कट्टे हो … गोरे हो … बहुत सुन्दर हो … मेरे से ज्यादा ऊंचे भी हो … मेरी तरह शायद आप भी कसरत करते हो. सवेरे दौड़ते होंगे, आपका भी कसरती बदन है.
मास्टर साहब- हां … पहले करता था, वजन उठाता था, दौड़ता तो अब भी हूँ. लेकिन अब कसरत नहीं कर पाता. टाईम ही नहीं मिलता; इसलिए ढीला पड़ गया हूँ.मैं- मैं भी उन लौंडों की तरह अभी लौंडा ही हूँ. उन लौंडों से हो सकता कि थोड़ा उन्नीस होऊं … उनके जितना माशूक न होऊं, पर अपने को मैं अभी भी लौंडा ही मानता हूँ.मास्टर साहब- अरे डॉक्टर साहब, उनसे आप उन्नीस नहीं इक्कीस हैं. मेरे से भी तगड़े हैं.
मास्टर साहब शायद मेरी बात समझ गए थे. मैं मुस्कुरा दिया.
वे बोले- अच्छा डॉक्टर साहब … अब कहां जाएंगे, मेरे घर चलें … वहीं नाश्ता पानी करेंगे; फिर मैं आपको …