This story is part of the KAHANI MERE PARIWAR MEIN HUE SAMBHOG KI series
पिछली कहानी में आपने देखा कि मैंने अपनी मां को कैसे ना बोलते हुए भी मना लिया और उनको रात भर 5 बजे तक बे-दम चोदा था।
सुबह हुई और मां मुझे उठाने आई और मैंने उसे पकड़ लिया था।
इतने में चाची बाहर हाल में बैठी थी।
अब आगे की कहानी:-
मैं और मेरी मां हम सेक्सी बातें कर रहे थे। इतने में चाची कब हाल में आई हमें पता ही नहीं चला।
बाहर से चाची ने आवाज लगाई: मीनाक्षी दीदी।
तब मैं और मां ने एक दूसरे का हाथ छोड़ा और मां बाहर चली गई। हम दोनों को लग रहा था कहीं उन्होंने हमारी बाते तो नहीं सुनी होगी।
फिर मां बाहर जाके चाची से पूछती है: तू कब आई?
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चाची: मैं बस अभी ही आई हूं।
मां: अच्छा आजा बैठ।
मां बिना बोले समझ गई और किचन में चली गई। वो वहां से उनके लिए फिर से खीरा लेकर आई, और उसे दे दिया।
मैं अभी भी ये सोचने लगा था कि आखिर चाची रोज-रोज खीरे का करती क्या थी।
वो जा रही थी, तब मां ने उससे कहा: आ ना बैठ, कहां जा रही है?
चाची ने कहा कि: आप मां-बेटा बातें करो, मैं जाती हूं। घर …