हेल्लो दोस्तों, अब आप आगे की कहानी का मजा लीजिये, अगर इस सेक्स स्टोरी का पिछला पार्ट नहीं पढ़ा है, तो अभी पढ़िए!
बाबु जी शायद भांप गए थे के मेरा मन उनका मूसल लण्ड देखकर बहक गया है। उन्होंने मुझे अपने आगोश में लिया और मेरी पीठ सहलाने लगे। उनके स्पर्श मात्र से ही मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया। अब मैं भी चाहती थी के मेरी चुदाई हो।
लेकिन मुंह से बोलने की हिम्मत नही हो रही थी। बाबू जी ने मुझे बेड पे ही लिटा लिया और खुद ऊपर आकर मेरे होंठो का रसपान करने लगे। पहले तो मैं बनावटी गुस्सा दिखाने लगी। लेकिन जब मुझे भी मज़ा आने लगा तो मैंने विरोध करना बन्द कर दिया और उनका साथ देने लगी। हम अपने काम में व्यस्त थे के मोबाइल पे रमेश की काल आ …