हम दोनों भाई बहन के जिस्मों के अंदर चुदाई की आग भड़क चुकी थी लेकिन आँख की शर्म अभी थोड़ी बाकी थी. मैंने अपनी बड़ी बहन को दिन में खुल कर कैसे चोदा?
भाई बहन सेक्स स्टोरी के पिछले भागमेरी आपा की औलाद की ख्वाहिश-3में आपने पढ़ा कि मैं गलती से अपनी बहन की चुदाई कर चुका था. लेकिन अब हम दोनों भाई बहन के जिस्मों के अंदर चुदाई की आग भड़क चुकी थी पर दोनों किसी भी तरह अपने घर आ गए.
जैसे ही मैंने बाइक घर के अंदर पार्क की, तभी अम्मी आकर बोली- अशफ़ाक बेटा … मैं बहू को लेकर पास वाले पड़ोस के घर जा रही हूँ. जब तक हम दोनों वापिस ना आयें, तब तक तू घर में रहना.फिर अम्मी ने मेरी बीवी को आवाज दी- शनाज़ … बेटी ज़ल्दी आ.
तभी ज़ोहरा आपा की सासू का फ़ोन अम्मी के मोबाईल पर आया. अम्मी थोड़ा दूर खड़ी होकर ज़ोहरा की सासू से बात करने लगी. कुछ देर बाद फ़ोन कट गया.
अम्मी का चेहरा उतर गया था.ज़ोहरा- क्या हुआ अम्मी?
अम्मी गुस्से में अब्बू को कोसने लगी- मैंने पहले ही कहा था कि वो रफ़ीक़ तेरे लिए ठीक नहीं है.मैं- अम्मी … आखिर बात क्या है?अम्मी गुस्से में- ज़ोहरा की सास कह रही है कि अगर इस बार ज़ोहरा के हमल ना रुका तो अगली बार रफ़ीक़ की दूसरी शादी करवा देगी.
तब तक शनाज़ सजीधजी बाहर आई- क्या हुआ अम्मी?अम्मी- अभी तू चल … तुझे रास्ते में बता दूंगी.इतना बोलकर अम्मी शनाज़ को लेकर चली गई.
ज़ोहरा आपा उदास होकर कमरे में चली गई.
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