Uncategorized

पड़ोसन बनी दुल्हन-15

This story is part of the Padosan bani dulhan series इधर सुषमाजी और राज की कहानी को भी पनपना ही था। चलिए सुनते हैं क्या हुआ सुषमाजी और मेरे पति के बिच। सुषमा और राज की कहानी राज की जुबानी जब सेठी साहब टीना को लेकर कार में निकले थे उस समय मैं ऑफिस में था। शाम को घर लौटते समय कुछ सब्जी फल इत्यादि सुषमाजी के लिए ले आया। जब तक टीना वापस नहीं लौटती, मेरा खाना अब उन्हीं के वहाँ होना था। पहुँचने के पहले ही मैंने फ़ोन कर बता दिया था तो सुषमाजी भी मेरा इंतजार कर रहीं थीं। मेरे पहुँचते ही मैंने पाया की सुषमाजी ने टेबल पर चाय नाश्ता तैयार रखा हुआ था। सुषमाजी के बारे में एक बात कहनी पड़ेगी। हालांकि वह सेठी साहब के साथ रह कर बड़ी ही ज़मीनी बातें करतीं थीं, सुषमाजी का अंतर्मन बड़ा ही संवेदनशील था। मैंने उनके अंदर छिपा हुआ एक अत्यंत संवेदनशील इंसान, जो एक कलाकार या कला को समझने और सराहने वाला होता है, पाया। जब भी हम कोई कला या ऐसी ही कोई संवेदनशील बातें करते, सुषमाजी अक्सर भावुक हो जातीं। इसी कारण मेरा और सुषमाजी का स्वाभाविक तालमेल पहली ही मुलाक़ात से हो गया था। मैं संगीत और कला का दीवाना था। सुषमाजी संगीत और कला के संसार में पहले से ही डूबी हुई थीं। सुषमाजी ने मुझे जल्दी फ्रेश होकर आने के लिए कहा। करीब आठ …

💬 కొత్త కథలు ,ఎపిసోడ్ అప్డేట్స్ కోసం ఏదైనా డౌట్స్ ఉంటె టెలిగ్రామ్ లో జాయిన్ అవ్వండి
📲 ఇప్పుడే మా Telegram ఛానల్‌లో చేరండి!

📢 కొత్త కథలు వెంటనే Telegramలో!
👉 మా Telegram ఛానల్‌లో చేరండి 👈

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
A prima vista, un blog personale sembra solo una vetrina di pensieri. In realtà, racconta metodo e identità: vale la pena approfondire il tema. D'inverno bimba di cinque anni ingoia lingotto Da fuori, un blog personale sembra semplice, ma dietro ogni pagina servono costanza, voce autentica e cura dei dettagli.
📲 మా Telegram ఛానల్‌లో చేరండి
Join Telegram Join our Telegram Channel

Adblock Detected

please remove ad blocker