मैं शादीशुदा लड़की हूँ। रिश्तेदारी में मैंने एक लड़के को लड़की जैसा बर्ताव करते देखा तो मैंने कुछ करने का फैसला किया उस लड़के की भलाई के लिए.
कहानी का पहला भाग: एक रात लौंडे के साथ-1वो थोड़ा मायूस सा होकर बोला- क्या दीदी अपनी किस्मत इतनी अच्छी नहीं, लड़की से मैं करना नहीं चाहता, और किसी लड़के से करवाने में डर लगता है।मैंने पूछा- कैसे डर?वो बोला- सुना है पहली बार में बहुत दर्द होता है?मैंने कहा- हाँ, दर्द तो होता है, पर बाद में इतना मज़ा आता है कि दर्द वर्द सब भूल जाते हैं।
वो बोला- तो आप क्या कहती हो, मुझे क्या करना चाहिए?मैंने कहा- ऐसा है कि पहले तुम अपने आप को पहचानो कि तुम क्या बनना चाहते हो क्या करना चाहते हो। उसके बाद पक्का फैसला करके अपनी कोई गर्लफ्रेंड या बॉयफ्रेंड बनाओ। और फिर मज़े करो।सुशी बोला- यही तो दिक्कत है दीदी, मैं फैसला नहीं कर पा रही हूँ कि मैं क्या बनूँ।
मैंने कहा- ऐसा है, एक तजुरबा करके देखते हैं।वो बोला- कैसा तजुरबा?मैंने कहा- मैं तुम्हें तैयार करूंगी, और तुम मुझे तैयार करोगी, और इस दौरान हम दोनों में जो भी होगा, सब कुछ खुल्लम खुल्ला होगा, देखो असल में हो तो तुम एक लड़के ही न, एक मर्द और मैं हूँ एक औरत, अगर तुम्हारी मर्दानगी जाग गई तो …