मैंने अपनी कुंवारी बहन के पैर ऊपर की तरफ मोड़ दिये और लंड उसकी रसीली बुर की लकीर पर रगड़ने लगा, जिससे वो पागल हो गयी. वो तड़फ कर बोली- आंह भैया … जल्दी कुछ करो … नहीं तो मैं मर जाऊंगी.
बहन भाई के प्यार की सेक्स कहानी के पिछले भागभाई बहन के प्यार से सेक्स तक-2में आपने पढ़ा कि मैंने अपनी बहन की कुंवारी बुर की झांटों के जंगल को साफ़ करके उसकी बुर को चूम लिया था और उसे नंगी ही अपनी गोद में लेकर लेटा था. मेरा लंड लोअर में से ही उसकी बुर में टच हो रहा था. वो भी मुझसे गांड चिपका कर लेटी थी.
अब आगे:
जब सोते हुए मैंने श्वेता को किस किया तो पलट गई और उसका स्कर्ट ऊपर हो गया. उसकी मस्त रसीली बुर ठीक मेरे लंड के सामने आ गई थी. उसने अपनी बुर मेरे लंड पर दबाते हुए मुझे कई सारे किस मेरे पूरे चेहरे पर दे दिए और लास्ट में हम दोनों के लब आपस में कब जुड़ गए, कुछ पता ही नहीं चला. हम दोनों का ये दूसरा लिप किस था, पर ये अब कुछ अलग ही था.
चुम्बन करते हुए हम दोनों एक दूसरे की जीभ भी चूसने लगे. कुछ ही देर में उसका शरीर एकदम से गर्म हो गया, जैसे बुखार हो. उसके हाथ पैर में कंपकंपाहट होने लगी. वो सिर्फ किस करने से ही इतना गर्म हो गयी थी.
काफी समय तक किस करते हुए हम दोनों एक दूसरे को सहला रहे थे. मैं उसकी पीठ सहलाते सहलाते उसके चूतड़ों को सहलाने लगा, जो नंगे थे. फिर उसकी गांड की दरार में से होते हुए उसकी बुर तक पहुंचा, तो उसकी बुर गीली हो चुकी …