मेरी मेरी गांड की चुदाई कहानी में पढ़ें कि कैसे नंगी फोटो वाली और सेक्स कहानी वाली किताबें देखने के लालच में मैंने अपने से बड़े एक लड़के से गांड मरवा ली.
दोस्तो, मेरी गांड की चुदाई कहानी में मैंने बताया है कि कैसे पहली बार मेरी गांड मरी.
न जाने किन क्षणों में मैं घुटनों से हटकर अपने लड़खड़ाते पैरों से संतुलित कदमों से इधर उधर चलने लगा था. इस पूरे प्रकरण में एक बात जो सामान्य थी वो ये कि मैं छुटपन तक नग्न अवस्था में ही अधिक रहता था.
कितना सहज व सामान्य जीवन था वह. ना कोई संकोच मुझे, ना ही मेरे परिवार या गाँव में किसी को, जहाँ चाहे वहां मूत्र त्याग दो. अगर कहीं मल त्याग देता तो घर भागता धुलवाने के लिए. सभ्य समाज को भी उस कृत्य पर कोई आपत्ति करने का अधिकार नहीं होता था.
अब कभी कभी ऐसा प्रतीत होता है कि सम्भवत: ग्रामीण लोगों के लिंग के बलिष्ठ होने का यह कारण भी हो सकता है कि वो नगर के बच्चों के विपरीत मुक्त रूप से सहज ही बढ़ते हैं. उन्हें नन्हीं सी आयु से सेनेटरी पैड की जकड़न से मुक्ति और बिना किसी संकोच के नग्न विचरण का लाभ मिलता होगा.
एक बार मैंने उत्सुकता में अपनी दादी से इस विषय में चर्चा की थी. उन्होंने समझाया था कि जब तक बालक बिछौने/जांघिया को भिगोना नहीं छोड़ता तब तक उसे नग्न अवस्था में ही अधिक रखा जाता है हालाँकि बालिकाओं के सन्दर्भ ये स्वतंत्रता थोड़ी संकुचित होकर घर तक ही सीमित रहती है परन्तु बालक पूरे ग्राम में विचरते …