सेक्स करना है मैंने पड़ोस की भाभी से … यह इच्छा मैं काफी समय से अपने दिल में दबाये बैठा था. एक दिन अचानक वही भाभी मेरे घर आयी. तो मैंने क्या किया?
नादान उम्र की प्यास क्या होती है, मैंने इसी को इस सेक्स कहानी में आपके लिए लिखा है.
उस दिन रविवार था और मैं मस्त होकर सो रहा था, क्योंकि आज ऑफिस की छुट्टी थी. यही कोई 9 बजे होंगे तभी दरवाजे की घंटी बजी.
मैं- इसकी मां को चोदूं … सुबह सुबह से कौन अपनी मां चुदाने आ गया भोसड़ी का.
गुस्से में भुनभुनाते मैं दरवाजा खोलने गया. सामने देखा तो हमारे ही मोहल्ले की रूपा भाभी खड़ी थीं, वो अपनी बेटी के साथ आई थीं.मैंने अपने आपको संयमित किया और एक अच्छे पड़ोसी होने के नाते मुस्कुरा कर उनका अभिवादन किया, साथ ही अन्दर आने के लिए भी कहा.
रूपा भाभी- राज जी, सबसे पहले तो माफी चाहूंगी कि आपको सुबह सुबह डिस्टर्ब किया. मुझे पता है कि आप छुट्टी के दिन देर से सोकर उठते हो. यह मेरी बेटी है निशा … इसकी इंग्लिश बहुत वीक है, तो मैं चाहती हूँ कि आप थोड़ा बहुत इसको पढ़ा दिया करें.
मैंने गौर से देखा कि निशा की मादक जवानी किसी का भी लंड खड़ा कर सकती थी.तब भी मैंने मन में सोचा कि काश इसकी जगह तो रूपा भाभी ही होतीं … तो उनको गोदी में चोद चोद कर पढ़ाता.
खैर, मैंने भाभी से कहा- जी भाभी …