इस कामुक सेक्स कहानी के तीसरे भागखेल वही भूमिका नयी-3में अब तक आपने पढ़ा कि मैं अब तक नेता और कमलनाथ के अलावा रवि से सम्भोग करके बहुत ज्यादा थक चुकी थी. इसके बाद कुछ समय आराम करने के बाद जब मैं जागी, तो कान्तिलाल मेरे साथ सम्भोग करने को आतुर हो रहा था.अब आगे:
मेरा कांतिलाल के साथ पहले का भी सेक्स अनुभव था तो मैं जानती थी कि वो जल्दबाजी नहीं करेगा बल्कि मुझे पूर्ण रूप से उत्तेजित करके संभोग के लिए बाध्य कर देगा.
इन सब बातों को जानने के बाद भी मैं उसके वश में होती जा रही थी, पता नहीं क्यों. इससे पहले उन 3 मर्दों से मुझे नहीं मिला था, शायद उसकी कमी का मुझे अफसोस था और कांतिलाल से मेरे मन में कोई उम्मीद थी. इसी वजह से मैं उसकी बांहों के जाल में स्वयं फंसती चली जा रही थी.
मैं और कांतिलाल अब एक दूसरे के सीने से चिपक गए थे और वो मुझे हौले हौले से उत्तेजित करने का प्रयास करने लगा. उसने मेरी आंखों में देखता हुआ मेरी रानों, बांहों, कमर और चूतड़ सहलाने शुरू कर दिया. वो मुझे ऐसे देखने लगा, जैसे वो मेरा इन्तजार कर रहा था. उसके मादक छुवन से मेरे बदन में ऐसा लग रहा था, मानो हज़ारों चीटियां मेरे बदन में रेंग रही हों, मेरे जिस्म में एक मीठी सिहरन सी हो रही थी.
काफी देर इसी तरह मुझे टटोलने के बाद वो अपने होंठ, मेरे होंठों के करीब ले आया, पर मैं जस की तस रही.
कांतिलाल भले कितना भी सहनशील क्यों न होता … मगर बाकी मर्दों की तरह उसकी भी एक सीमा थी और अब उससे बर्दाश्त करना मुश्किल था. वो भी जान चुका था कि मुझे कैसे अपने वश में करना है … क्योंकि उसने मुझे पहली मुलाकात के समय भरपूर पढ़ा था.
उसने खुद ही अपने होंठ मेरे होंठों से चिपका दिए और मुझे चूमने लगा. मैं खुद को रोकने का प्रयास …