This story is part of the Drishyam, ek chudai ki kahani series
पिछली बार जब कालिया ने सिम्मी की चुदाई की थी उस बात को एक महीने से भी ज्यादा समय हो चुका था। सिम्मी को तबसे ही अपनी जाँघों के बिच में ऐसी तरवराहट होती रहती थी जो एक युवा किशोरी को इस उम्र में अक्सर होती है।
आधी रात में उठ कर वह महसूस करती थी की उसकी चूत में से रस बहता रहता था और उसके स्तन और ख़ास कर उसकी निप्पलेँ कस कर ऐसी सख्त हो जातीं की उसे स्वयं विश्वास नहीं होता की उसे हो क्या गया है।
अपनी उस आग को कुछ हद तक शांत करने के लिए सिम्मी अपनी चूत में उंगली डाल कर कालिया ने जैसे उसे लण्ड से चोदा था वैसे ही अपनी ही उँगलियों से हिला हिला कर अंदर बाहर कर वह अपना उस उफान शांत करने की कोशिश करती।
साथ साथ सिम्मी के भरी जवानी में अपने ब्रा के बंधन में नहीं समानेवाले दो गुम्बज में भी ऐसी अजीब सी तरवराहट होती की एक हाथ दो …