This story is part of the Padosan bani dulhan series
चुम्बन ख़तम होते है जेठजी ने मुझे प्यार से पलंग पर लिटाया। मुझे ऐसा लगा जैसे मेरी सुहागरात को मेरे प्रियतम ने मुझे प्यार करने के लिए पलंग पर लिटा दिया हो। जेठजी अपने हाथ से मेरे बदन को महसूस करने लगे। उनके हाथ पहले मेरे सिर से ले कर मेरे कपाल, मेरी नाक, मेरे होंठ, मेरी दाढ़ी से मेरी गर्दन पर होते हुए मेरे उरोजों पर कुछ देर टिक गए। मैं अपना हाल कैसे बयाँ करूँ?
रोमाँच के मारे मेरी चूत का बुरा हाल हो रहा था। मुझे लगा की मेरी चूत इतनी तेजी से पानी छोड़ रही थी की मुझे डर लग रहा था की कहीं मेरे कपडे ही गीले ना हो जाएँ। मुझे यह भी डर था की जेठजी का लण्ड डलवाने से पहले ही मैं कहीं झड़ ने ना लगूँ। कहीं जेठजी मेरी इस तरह की बेसब्री को भाँप ना ले और उन्हें शक ना हो जाए की मैं माया नहीं हकीकत में ही दूसरी औरत थी।
पर मैंने ठान ली थी की अब जो हो सो हो। मुझे जेठजी को खूब स्वछन्द भरा प्यार कर वह आनंद देना था जो मैं जब से इस घर में आयी थी तब से देना चाह रही थी। जेठजी अपनी जीभ से मेरे कपाल को चाट और चुम रहे थे। मेरे सर को चूमते हुए वह मेरी नाक, …