दो दिन से आपको मेरी सेक्स की स्टोरी पढने को नहीं मिल पाई, तो आज दो दो पार्ट पढ़िये और मजे करिए!
संजीव ने दरवाजा खोला और बच्ची दौड़ते हुए अंदर गयी और थोड़ी देर में एक नया खिलौना हाथ में ले वापिस दरवाजे से बाहर निकल गयी. उन्होंने फिर से दरवाजा बंद किया. मैं बाथरूम से निकल कर फिर हॉल में आ गयी.
हम दोनों की नजरे फिर से मिली और अभी जो कुछ भी हुआ था, ये सोच मैंने अपनी नजरे नीचे झुका ली. मैंने सोचा शायद इनका जमीर भी जाग जाए और अपना इरादा बदल ले.
पर एक महीने भर से तड़पते हुए मर्द को अगर मौका मिला हो तो वो भला कैसे छोड़ेगा.
उन्होंने मुझे अपनी गोद में उठा लिया था. वो मुझे बेडरूम में ले गए. मुझे आईने के सामने खडी किया और नीचे से गाउन पकड़ कर उठाते हुए मेरे सर से बाहर निकाल दिया. उन्होंने मुझे उठाया और बिस्तर पर उल्टी लेटा दिया.
उन्होंने एक दराज से कुछ सामान निकाल लिया. अब वो मेरे करीब आये और मेरी दोनों नाजुक कलाइयां पकड़ी और उनको पीठ पर ले जाकर उन पर एक हथकड़ी बाँध ली. उस पर मखमल का कपडा चढ़ा था तो चुभ नहीं रही थी.
मुझे समझ नहीं आया वो करना क्या चाह रहे थे. मैं कोई विरोध नहीं कर थी फिर इस हथकड़ी का क्या फायदा.
उन्होंने मुझे अब सीधा लेटा दिया और अपने हाथ में एक लंबी सी पंखनुमा चीज पकड़ ली. मुझे लग गया वो मुझे गुदगुदी …