शीतल सोचती सोचती नींद के आगोश में जा चुकी थी। सुबह जब उसकी नींद खुली तो वो नंगी ही सोई हुई थी। विकास सोया हुआ ही था। शीतल रोज सवेरे जागती थी और फ्रेश होकर नहा कर पूजा करके चाय बनाती थी और फिर विकास को जगाती थी। शीतल नंगी ही बेड से उठी और फ्रेश होकर नहाने चल दी। आज पहली ही बार वो अपने घर में ऐसे नंगी सोई थी और अब अभी ऐसे नंगी घूम रही थी। नहाने के बाद वो साड़ी पहन ली और फिर चाय बनाकर विकास को जगाई और किचन के काम में काग गयी। ये उसका रोज का नियम था, लेकिन शीतल का ध्यान दोपहर पे था कि वो कैसे वसंत से बात करेगी। वो खुद को तैयार कर रही थी की आज वसंत से खुल कर बात कर ही लेगी।
विकास ऑफिस चला गया और शीतल 1 बजने का इंतज़ार करने लगी। उसके मन में बहुत उथल पुथल मची हुई थी। आज वो स्टोर रूम में नही गयी थी। उसका प्लान था कि जब वसंत उसकी पैंटी ब्रा को हाथ में लेकर उसपर वीर्य गिराने की तैयारी कर रहा होगा, उस वक़्त वो ऊपर जायेगी और वसंत से खुल कर सारी बात करेगी। जैसे जैसे वक़्त …