This story is part of the Pados Ki Vidhwa Aurat Hina series
मित्रो, दीपक को पिछले २-३ महीने से काफी मेहनत करनी पड़ी थी, ताकि एक ३३ साल की विधवा औरत को अपने झांसे में फंसाकर वो मजा कर सके। वैसे भी शादी शुदा औरत हो या विधवा आसानी से वो अपना जिस्म किसी को नहीं समर्पित करती है।
एक मुलाकात बाज़ार में और फिर हिना ने मुझे अपने घर बुलाया और दोनों शारीरिक सम्बन्ध का एक अध्याय अपने जीवन में जोड़ लिया। हिना की अवस्था खेलने खाने की है यानी उसको हमसफ़र का प्यार, उसके साथ हमबिस्तर होना और अपने शरीर की भूख को मिटाने की तमन्ना है।
लेकिन अब तो उसका कोई हमसफ़र ही नहीं रहा था। एक दिन जब हिना और मै अपने झिझक को दूर करके अपने कामुकता को समझ कर, एक दूसरे के संग सहवास क्रिया कर रहे थे। तो समझो दूरियां ख़तम सी हो गई थी, और फिर हिना का मोबाइल नंबर मुझे मिल गया था।
एक सप्ताह बीत चुका था और इधर रिया दीदी की महवारी शुरू हो गयी थी। तो मै अब चुत चोदने को आतुर था, इसी क्रम में एक रात मै हिना के नग्न बदन की कल्पना करते हुए मैंने मुठ भी मारी।
लेकिन इससे लंड को शांत तो किया जा …