This story is part of the Nayi Dagar, Naye Humsafar series
हम दोनों एक दूसरे की आँखों में झांक रहे थे और वो धीरे धीरे मेरे करीब आता जा रहा था । नजदीक आकर उसने अपना एक हाथ मेरी कमर में डाला, मुझे लगा फिर से डांस करना चाहता हैं। मैं मुस्कुरा दी, और उसने अपना दूसरा हाथ मेरी पीठ पर लगा कर अपनी तरफ खिंचा। हम दोनों एकदम करीब आ गए थे।
खड़े खड़े ही उसने अपने होंठ मेरे होंठो के पास लाना शुरू कर दिया था। उसके होंठ मेरे होंठो से सिर्फ एक इंच की दुरी पर थे और मेरे मम्मे उसके सीने से टकरा गए । मेरे नाजुक मम्मे स्प्रिंग की तरह थोड़ा दब गए और उसके होंठ मेरे होंठो को चूमने ही वाले थे कि मुझे मेरी शपथ याद आ गयी।
मुझे अब इन सब एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर की चीजों में नहीं पड़ना था। मैंने उसको दूर किया और मुड़ कर भागते हुए फिर पार्टी हॉल में आ गयी। सब लोग अभी खाना खाने की तैयारी कर रहे थे । वहा जाने के बाद सुधा आंटी मेरे पास आये।
सुधा आंटी: “तुम्हे पता हैं आज बरसो बाद राहुल …