माय सिस्टर ऐस्स चुदाई कहानी में मैंने अपनी शादीशुदा चचेरी बहन को रात को खेतों में चोदा. वहां मैंने दीदी की गांड भी मारी. खुद पढ़ें और मजा लें.
कहानी के पहले भागदीदी की चूत मारने की तमन्नामें अपने पढ़ा कि मैं अपनी चचेरी बहन को उनकी ससुराल में ही चोद चुका था.काफी दिन बाद मैं दोबारा उनके घर गया तो दीदी सेक्स में कुछ रूचि नहीं दिखा रही थी. मैंने परेशान हो गया कि पता नहीं दीदी की चूत मिलेगी या नहीं.फिर रात को हम दोनों खेतों में गए फसल को पानी लगाने.वहां कुछ बात बनी.
नेहा दीदी हवस भरी नज़रों से देखते हुए बोलती- ठीक है! अब अपनी इस रण्डी बहन को अब मत तड़पाओ जान … अब जल्दी से चलो झोपड़ी में और मुझे अच्छे से चोदो!मैंने बोला- चल साली रण्डी, आज तेरी चूत की गर्मी शांत करूं!
नेहा दीदी ने अपनी पैंटी ऊपर करते हुए अपनी शाल उठाई और साड़ी को वहीं छोड़ दिया।फिर मेरे लंड को अपने हाथ में पकड़ कर झोपड़ी में लेकर चली गई।
अब आगे माय सिस्टर ऐस्स चुदाई कहानी:
जैसे ही दीदी शाल बिछाने लिए झुकी, उनका पेटीकोट उनकी गांड में घुस गया।जिसे देख कर मुझसे रहा नहीं गया, मैंने पेटीकोट के ऊपर से ही उनके गांड की दरार के बीच में उंगली फंसाते हुए उनकी गांड के छेद में अपनी उंगली घुसा दी।
नेहा दीदी चिहुंकती हुई गुस्से में बोली- बहनचोद! मेरी चूत की गर्मी शांत करनी है, मेरी गांड की नहीं!फिर वे जल्दी से नीचे सीधी हो कर लेट गई।
मैं अपने …