तूफान शांत होने के बाद मेरा लण्ड फिर से हलचल करने लगा। अब मै आँटी के रसीले होंठो पर फिर से टूट पड़ा। आँटी भी मेरा साथ देते हुए मेरे होठो को खाने लगी।रूम फिर से ऑउच्च पुच्च ऑउच्च पुच्च की आवाज़ों से गूंज उठा। तभी मैने मौका देखकर आँटी के भोसड़े में उंगलिया घुसा दी। अब मै आँटी के भोसड़े को सहलाते हुए आँटी के होंठो को चुस रहा था।
तभी आँटी कसमसाने लगी। वो मेरा हाथ पकड़कर दूर खींचने लगी लेकिन मै मान नहीं रहा था। मै आँटी के भोसड़े को बुरी तरह से कुरेदने लगा। आँटी भी बार बार उनके भोसड़े को मुझसे छुड़ाने की कोशिश कर रही थी।
फिर मैंने आँटी के बलाउज ब्रा को खोल फेंका और आँटी को पूरी नंगी कर दिया। अब मै आँटी के बोबो को नींबू की तरह निचोडने लगा। तभी दर्द के मारे आँटी की गांड फटने लगी।
“ओह कुत्ते धीरेरेरे,,,, धीरेरेरे आईईईईई।”
“ओह साली, दबाने दे, आह्ह बहुत मज़ा आ रहा है। बहुत मस्त अमरुद है तेरे।”
“तो अमरूदों को आराम आराम से तोड़ ना कुत्ते। बहुत दर्द हो रहा है साले।”
“ओह साली ,चुप रहे।मै तो ऐसे ही तोडूंगा। वैसे भी इस बाग का मालिक अब मै हूं।”
“हां मेरे मालिक, लेकिन थोड़ी तस्सली से तोड़ो , अमरूदों को। आगे भी के अमरुद आपको ही खाने है।किसी और को नहीं।”
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