गे सेक्स कहानी के पहले भागकुलबुलाती गांड-1में आपने पढ़ा कि मैं गांडू हूँ तो मैं गांड मराना चाहता था अपने रूममेट से … लेकिन उसे मुझमें कोई रूचि नहीं लगती थी.उसने मेरे सामने मेस चलाने वाली की बेटी चोद दी.अब आगे की गे सेक्स कहानी:
एक दिन उसके मामा जी आए. शाम का समय था, उनके साथ डिनर लिया, घूमे और रात को कमरे पर लौटे.
वे यही कोई अट्ठाइस तीस के होंगे, मेरी हाईट के, मोटे तो नहीं पर हल्के दोहरे बदन के! थोड़ा सा पेट दिखता था. गाल फूले फूले से … बड़े बड़े चूतड़, मोटी मोटी जांघें, हल्के सांवले/गेंहुए रंग के!अपने शहर होशंगाबाद से बिजनस का सामान लेने आए थे।
चूँकि हमारे पास एक ही बिस्तर व पलंग था, अतः गद्दा आड़ा करके बिछाया पैरों के नीचे दरी बिछाई. हम तीनों एक साथ लेटे. पहले मामा जी, फिर अनिल, फिर मैं!रात को लाईट बंद कर हम सो गए, थके थे नींद आ गई।
रात को मामा जी ने अनिल को करवट दिलाई, उसका चेहरा मेरी तरफ कर दिया. पीठ उनकी तरफ!फिर अनिल बेाला- नहीं मामा जी, वह देख लेगा.पर मामा जी बोले- वह सो रहा है.
और उन्होंने उसका अंडरवीयर नीचे खिसका दिया. अपने खड़े लंड पर थूक लगा कर उसकी गांड के छेद को अंदाज से उंगली से टटोला और अपना नौ इंची का हथियार थूक लगा कर उसकी गांड में पेल दिया.अनिल चिल्लाया- मामा जी … लग रही है. जरा धीरे से … फट जाएगी आ… आ… आ… ब… स… थोड़ा … रूको!पर मामा जी नहीं रुके, वे जोश में थे. दो तीन झटके लगाए और उसे औंधा होने को कहा.
वह मना करता ही रहा पर वे उसके ऊपर चढ़ बैठे और अपना आजमूदा हथियार चालू कर दिया, अंदर बाहर … अंदर बाहर!वे लगे हुए थे, मुझे उन देानों की आवाजें आ …