माँ बेटे की चुदाई की कहानी में पढ़ें कि कैसे मैंने अपनी स्टेप मॉम के साथ सेक्स करके उनकी वासना को शांत किया और खुद भी पूरा मजा लिया.
माँ बेटे की चुदाई की कहानी दूसरा भाग: सौतेली माँ की चुदाई का आनन्द-2
अब मैं उठा और मॉम को सीधा लेटा दिया और बोला- मॉम, अभी मैं जो करूंगा उससे आप गुस्सा मत होना और दर्द हो तो मना कर देना, मैं फिर रोक दूंगा.मॉम बोली- बेटा तू कुछ भी कर, मैं कुछ नहीं बोलूंगी.
फिर मैंने पलंग पर बैठे बैठे मॉम के दोनों बूब्स को ज़ोर से ऊपर की ओर खींचने लगा जैसे रबड़ को खींचते हैं. बहुत बड़े थे बूब्स और सॉफ्ट भी बहुत थे.मॉम की हल्की चीख निकल रही थी ‘आह ओह उह आह आ …’ लेकिन मॉम मना नहीं कर रही थी.
मैंने फिर पूछा- मॉम रुक जाऊं या चालू रखूँ? आपको अच्छा लग रहा है?मॉम बोली- चालू रख … मज़ा आ रहा है … दर्द तो थोड़ा होता ही है. तेरे पापा का तो यह रोज का था, इन बूब्स को इतना खींचते थे कि मैं खुद बूब्स के साथ उठ जाती थी.यह सुनकर मैंने थोड़ी तेजी से बूब्स को खींचना शुरू किया, मैं एक एक करके बूब्स को खींच रहा था.
फिर मैंने मॉम के होंठों पे अपने होंठ चिपका दिए जिससे मॉम की आवाज़ भी बंद हो गई और मॉम को मस्त जबरदस्त चुम्मा दे रहा था. मॉम के मीठे, गुलाबी, मोटे और कोमल होंठों को मैंने अपने मुंह में ले लिया था. मॉम को मज़ा आ रहा था.
इधर मेरे हाथों से मॉम की बूब्स खींचने का कार्यक्रम जारी था. 15 मिनट बाद यह प्रोग्राम समाप्त हुआ. मॉम के निर्दोष दोनों खरबूजे मेरे बेहरम हाथों से आजाद हुए और मॉम …