देव मंजू को उठाकर मेरे कमरे में ले आया। मंजू अपनी छटपटाहट से देव का काम मुश्किल बना रही थी। मंजू जैसे तैसे देव के चुंगल से छटकना चाहती थी। पर अब देव ज़रा भी असावधान रहने वाला नहीं था। देव ने मंजू को पलंग पर लिटाया। मैं कमरे से बाहर निकल आया और पीछे से दरवाजा बंद किया तो देव ने कहा, “छोटे भैया, दरवाजा खुला ही रहने दो। आज यह छमनियाँ मुझसे कैसे चुदती है वह तुम भी देखो।” सेक्स स्टोरीज इन हिंदी चुदाई कहानी
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पर मैं बाहर निकल आया। मुझे अंदर से दोनों की आवाज स्पष्ट सुनाई दे रही थी। मंजू अभी भी देव को चुनौती दे रही थी। वह बोली, “अच्छा! तो तू सोच रहा है तू मुझे आज चोदेगा? तू अपने आपको क्या समझता है? तू मुझे छूना भी मत। अगर तूने मुझे छुया भी तो मैं तुझे नहीं छोडूंगी।”
तब देव बोला, “अरे छमिया, तू मुझे छोड़ना भी मत। मैं भी तुझे चोदुँगा जरूर, पर छोडूंगा नहीं। आज मैं तुम्हें पहली बार चोदुँगा पर आखरी बार नहीं। अब तू मेरी ही बन कर रहेगी। तू मेरे बच्चों की माँ बनेगी और मेरे पोतों की दादी माँ।”
मंजू ने यह सूना पर पहली बार उसका जवाब नहीं दिया। देव ने उसे मेरे पलंग पर लिटाया और भाग न जाए इसके लिए देव ने मंजू को अपने बदन के नीच दबा कर रखा। देव ने अपना सारा वजन मंजू के बदन पर लाद दिया था। मंजू ने एड़ीचोटी का जोर लगा दिया पर अब देव उसे छोड़ने वाला नहीं था। यह कहानी आप देसी कहानी डॉट नेट पर पढ़ रहे है।
मुझसे रहा नहीं। गया मैंने दरवाजे के अन्दर झांका तो देखा की देव मंजू को अपने तले दबा कर उसके ऊपर चढ़ गया था। मंजू को देव ने अपनी दो टाँगों में फाँस कर अपना लण्ड उसकी चूत से सटा कर वह मंजू के ऊपर लेट गया। मंजू के लिए अब थोड़ा सा भी हिलना …