गांव में मैंने एक लड़की पटा कर चोद दी थी. फिर मैं शहर चला गया. जब लौटा तो मैंने सोचा कि उसे रंडी बनाकर चोदूंगा. मगर हो कुछ और ही गया!
नमस्कार दोस्तो! कैसे हो आप सब?मेरी पिछली कहानियों को आप सब ने बहुत प्यार दिया और आप सभी की तरफ से बहुत सारे संदेश भी मिले.मुझे बहुत खुशी हुई कि आपको मेरी देसी सेक्स कहानी पसंद आई.
मुझे मिले संदेशों में बहुत सारे मेल महिला पाठकों के भी थे. यह और भी ज्यादा हर्ष की बात है मेरे लिये कि मैं देसी चूतों को गर्म करने में कामयाब रहा.
आज मैं आपके लिए फिर से अपनी देसी लड़की की चूत कहानी लेकर आया हूं जो मेरी पहली कहानीगांव की कच्ची कली- 1औरगांव की कच्ची कली- 2के आगे की कहानी है.
अगर आपने पहले दो भाग नहीं पढ़े हैं तो आप इस कहानी को शुरू से पढ़ें और देसी लड़की की चूत कहानी का मजा लें.
पुराने पाठकों के लिए मैं पिछले भाग का संक्षिप्त सार बता रहा हूं कि कैसे मैंने पिछले भाग में अपने गांव के दोस्त सोनू की बहन नेहा की जवानी का रस चखा.
मैंने अकेली पाकर उसको पकड़ा और उसके नींबू जैसे चूचे चूसकर उसकी कमसिन कुंवारी छोटी सी देसी चूत को चाट कर उसको गर्म किया. फिर अपना लंड उसकी मुनिया में घुसा कर उसी सील तोड़ दी.
पहली चुदाई उसकी हो चुकी थी. उसके बाद फिर तो वो खुद ही मेरा लंड पकड़ लेती थी और मैं उसको चोद देता था.अब नेहा चुद चुदकर कली से फूल बन गयी थी.
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