नमस्कार दोस्तों, आपका अपना दीप पंजाबी आपकी सेवा में एक नई कामुक मेरी हिन्दी चुदाई कहानी लेकर हाज़िर है। ये कहानी भी पिछली कहानी की तरह मेल केे द्वारा एक नए दोस्त ने भेजी है। सो आगे की कहानी उसी की ही ज़ुबानी…
सबसे पहले तो देसी कहानी डॉट नेट साईट के सभी चाहने वाले समीर का प्यार भरा नमस्कार कबूल करे । मेरा खुद का अपना टेलिकॉम का बिज़नस है और मैं पंजाब से ही हूँ| मेरी उम्र 25 साल है। मैं इस साईट से कई महीनो से जुड़ा हुआ हूँ। ये मेरी पहली कहानी है। सो कृपया यदि कोई गलती लगे तो नौसिखिया बच्चा समझ के माफ़ कर देना।
आपका ज्यादा समय बर्बाद न करते हुए सीधा आज की कहानी पे आते है।
इस कहानी का बनना एक महज एक संयोग कह सकते है। हुआ यूं के एक दिन मैं अपनी दूर की रिश्तेदारी हरियाणा में किसी काम से गया हुआ था। वहां से हफ्ते बाद अपना वो काम निपटाकर वापिस अपने घर की तरफ लौट रहा था।
मेरा घर एक छोटे से गांव में होने की वजह से शहर से बस, ऑटो या टैक्सी लेकर आना पड़ता था। जो के मेरे गांव से 20 किलोमीटर दूरी पे था। सो उस दिन जैसे ही हरियाणा से सुबह की चली बस, पंजाब में एक चौक पे शाम को आकर रुकी। तो मैं नीचे उत्तर कर अपने घर की तरफ जाने वाले किसी वाहन की प्रतीक्षा करने लगा। इतने में मौसम एकदम बिगड़ गया और एक दम बरसात होने लगी। मैं भीगने से बचने के लिए भागकर किसी सुरक्षित स्थान की और दौड़ने लगा।
लेकिन दूर दूर तक कोई ठहर दिखाई न दी। वहां से काफी दूर थोड़ी देर आर्ज़ी तौर पे तयार की घास फूस की झोपडी की आड़ में सहारा लेकर भीगने से बचने का असफल प्रयास करने लगा। मैंने खुद को ज्यादा भीगता देखते हुए कोई और सुरक्षित ठिकाना ढूंढने का विचार बनाया। उस जगह से लगभग एक किलोमीटर दूर एक घर दिखाई दिया। जिसकी अंदर वाली लाइट रोशनदान से जलती हुई दिखाई दे रही थी। मैंने वहां जाकर उस घर का दरवाजा खटखटाया।
कुछ ही पलो में एक सुंदर सी लड़की जिसकी उम्र यही कोई 25 साल होगी, रंग गोरा, लम्बा गाउन पहने थी, उसने दरवाजा खोला। मेरे चेहरे और मुझे भीगा हुआ देखकर…वो — हांजी कहिये ??
मेरे गले में लटके बैग को देखकर उसने मुझे शयद कोई सेल्समन समझ लिया होगा ऐसा मेरा मानना था।
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