This story is part of the Padosan bani dulhan series
चोदते हुए वह माया की निप्पलोँ को मुंह में रख कर उसे चूसना और काटना भी नहीं चूकते। धीरे धीरे जैसे जैसे माया को चुदाई का दर्द कम महसूस होने लगा वैसे वैसे माया भी जेठजी को अपनी कमर के साथ अपनी चूत ऊपर की और उछाल कर उनकी चुदाइ की लय में लय मिलाती हुई जेठजी का लण्ड और अंदर घुसाने में जेठजी की सहायता करती।
माया की तगड़ी चुदाई करते हुए जेठजी के कमरे में उनकी जाँघों के माया की जाँघों से होते टकराव से पैदा होती “फच्च…. फच्च…. ” की कामुक उत्तेजक आवाज से कमरा गूंज रहा था। चुदाई के दरम्यान माया अपनी टांगें कभी जेठजी के कंधे पर तो कभी जेठजी की दोनों बगल के अंदर हवा में अद्धर उठाती हुई जेठजी से खूब प्यार से चुदवाने लगी थी। जेठजी ने जब एक तगड़ा धक्का मार कर अपना आधा लण्ड माया की चूत में घुसेड़ा था …