This story is part of the Nayi Dagar, Naye Humsafar series
जोसफ ने मुझे अच्छी तरह से चोद कर रख दिया था। इस जबरदस्त चुदाई को देख कर सैंड्रा अपने गाउन को ऊपर उठाये अपनी चूत में ऊँगली कर रही थी।
सामने जैक खड़ा था, उसके शार्ट में उसका लंड खड़ा हो चूका था । वो तुरंत बाथरूम की तरफ गया। मेरे झड़ते ही जोसफ ने भी धक्का मारना बंद कर दिया था। मैं उसके ऊपर से उतरी तो देखा उसके काले लंड पर दूध की नदिया बह रही थी।
सैंड्रा: “जोसफ, मुझे पता हैं तुम्हारा नहीं हुआ हैं। ”
जोसफ: “कोई बात नहीं, मैं ठीक हूँ, जितना मजा आया ।”
सैंड्रा: “मेरा कल का बदला बाकी हैं, जोसफ तुम प्रतिमा की गांड मारो, तुम्हारा भी हो जायेगा और मेरा कल का बदला भी। ”
मैं भी चाहती थी उसका पूरा हो उसने मुझ पर इतनी मेहनत जो की थी पर अपनी गांड में उसका मोटा लंड लेना मतलब मौत को दावत देना था। मैं अपने कपड़े पहनने के लिए उठाने लगी। पर सैंड्रा ने आगे आकर मुझे पकड़ा और जोसफ को मुझे सोफे पर उल्टा लेटाने को कहा।
जोसफ ने वैसा ही किया, शायद उसको भी पूरा करना था। मैं उनको दुहाई देते मना ही करती रह गयी।
जोसफ ने मुझे उल्टा लेटा दिया। सैंड्रा ने आकर मेरी गांड़ के दोनों गालो को पकड़ दरार को चौड़ा कर जगह बनाई और जोसफ ने अपने लंड की टोपी को मेरे गांड के छेद के बाहर रखा। मैंने सोचा आज तो मेरी गांड फटने वाली हैं। …