बहू ने साड़ी उतारने के बाद अपना पेटीकोट उतारा. मैंने देखा कि उसने नीचे कच्छी भी नहीं पहनी थी. बहू ने फिर ब्लाउज उतारा. ब्लाउज के नीचे उसने जाली वाली ब्रा पहनी थी.
कहानी का पिछला भाग: शहर की चुदक्कड़ बहू-4
थोड़ी देर में बहू बाहर आयी तो मेरी तो आँखें और लंड दोनों बाहर आने को होने लगे.मेरी बहू ने एक पीले रंग की साड़ी पहनी थी और पीले रंग का ही ब्लाउज!और साड़ी बहू ने इतनी नीचे बंधी थी कि बस थोड़ा नीचे और हो जाये तो बस बहू की झांटें दिेखने लगे.
बहू के ब्लाउज में उसके बूब्स की लाइन दिेख रही थी. उस टाइम बहू मुझे कामुकता की देवी लग रही थी. बड़े बूब्स … इतनी सेक्सी कमर और कमर पर पड़ते वो बल! कमर में पड़ी चैन और उसकी गहरी नाभि में पड़ा वो छल्ला … मन कर रहा था कि यहीं कपड़े फाड़ के अपनी बहू को चोद दूँ.
फिर बहू ने स्कूटी निकाली.बहू बोली- बैठो डैडी जी.मैंने कहा- बहू स्कूटी तुम चला लोगी?बहू बोली- हाँ डैडी जी.
फिर बहू और मैं शॉपिंग करने निकल गए.
रास्ते पर चलता हर आदमी बहू को खा जाने वाली नज़रों से देख रहा था और मेरा ध्यान भी मेरी मेरी बहू की …