थोड़ी देर चूत चाटने के बाद बेटे ने बहू की पैंटी निकाल दी और अपना लंड बहू की चूत में डाल दिया. और जोर जोर से धक्के लगाने लगा. बेटे के हर धक्के से बहू की आवाज ‘आह आह … जोर से करो!’ आ रही थी.
कहानी का पिछला भाग: शहर की चुदक्कड़ बहू-1
मैं अपनी बहू बेटे के घर पर पहुंच गया. दरवाजा खुला सामने जो देखा. मेरी बहू एक छोटे से निकर में और एक स्पोर्ट ब्रा में खड़ी थी पूरी पसीने से भीगी हुई. बहू के चेहरे से और गर्दन से बहता हुआ पसीना उसकी ब्रा और बूब्स में जा रहा था. पेट के बीच में एक गहरी नाभि और उस नाभि में एक रिंग डाल रखी थी.
मैं तो जैसे स्वर्ग में आ गया था. तभी बहू ने मेरे पैर छुए और अन्दर भाग गयी.
तब मैं अंदर गया तो बहू एक लोअर और टी शर्ट पहन के आयी.बहू बोली- कैसे हैं डैडी जी? आप इस बार आप बिना बताये आ गये?
मैंने कहा- बहू, बस इस बार सोचा कि सरप्राइज दे दूँ.सच में उस दिन मुझे मेरी बहू को देखकर बुरा नहीं बल्कि अच्छा लग रहा था.
जब वो रसोई में जा रही थी तो मेरी नजर उसकी गांड पर थी.क्या मोटी गांड है मेरी बहू की!मेरा लंड मुझे …