This story is part of the Drishyam, ek chudai ki kahani series
ना डरना ओ मेरे राही अगर राहों में भटके हो। यदि हो चाह मंजिल की तो रास्ते मिल ही जाते हैं।ना हो मुश्किल जो राहों में सफर का क्या मज़ा साहिल, लगादें जान जो अपनी वही मंजिल को पाते हैं।
यदि आपके दिल में कोई काम करने की जबरदस्त लगन है, तो छोटीमोटी अड़चनों को पार करने के रास्ते तो निकल ही आते हैं। सवाल यह है की आपके इरादे मजबूत होने चाहियें। अपनी समस्याओं को हल करने के लिए क्या करना चाहिए यह सिद्दत से सोचने के लिए दिमाग लगाना पड़ेगा। अर्जुन मेरी बात सुनंने के लिए बड़ा ही बेताब था। उसने पूछा, “क्या रास्ता है सर?” अर्जुन मुझे कभी अंकल तो कभी सर कह कर बुलाता था।
मैंने लिखा, “एक विवाह का और तरिका है, उसे कहते हैं गन्धर्व विवाह। तुमने शायद पढ़ा होगा की सदियों पहले राजा दुष्यंत ने शकुंतला से ऐसा ही विवाह किया था। इसी विवाह के आधार पर तो एक प्रसिद्ध ग्रन्थ लिखा गया था जिसका नाम है “अभिज्ञान शाकुंतलम”
अर्जुन, “हाँ सर, दुष्यंत और शकुंतला के बारे में तो पढ़ा जरूर है। पर ज्यादा कुछ याद नहीं।”
मैंने लिखा, “मेरी बात ध्यान से …