वो एकदम भोली शकल बनाते हुए वादा करने लगा कि वो मुझे चोदने के बाद कुछ नहीं होने देगा और ध्यान रखेगा कि पानी निकलने के पहले ही लंड चूत से बाहर निकाल देगा।
अब मैं एक बार फिर से तैयार हो गई राज के लम्बे लण्ड से अपनी चूत की एक असुरक्षित चुदाई के लिए।
राज : “मुझे तुम्हारा चक्रासन अच्छा लगा। तुम वो आसन फिर से करो और मैं तुम्हे उसी स्तिथि में चोदूंगा”।
मैंने तो कभी सोचा भी नहीं था कि योग के आसन करते हुए भी चोदा जा सकता हैं। उसकी नयी सोच को सुन मैं भी रोमांचित हो गयी।
मैं अब बिस्तर से नीचे उतरी और एक बार फिर चक्रासन की स्तिथि में आ गयी। उसने मुझे पाँव ओर चौड़े करने को कहा, मैंने वैसा ही किया।
बिना कपड़ो के चक्रासन करना ही अपने आप में बहुत गरम मामला था। मेरी चिकनी चूत को इस तरह देखकर वो शायद बावरा हो गया।
वह मेरे दोनों पांवो के बीच आकर खड़ा हो गया और अपना लंड पकड़ कर अपने हाथ से रगड़ते हुए ओर कड़क और लम्बा करने लगा।
वो अपने लंड को पकड़, उससे मेरी चूत पर थप्पड़ मारने लगा। चटाक चटाक की आवाजे आने लगी। उसका लंड बहुत भारी था और वो मिला मिला कर मार रहा था तो थोड़ा दर्द भी हो रहा था और उस चटाक की आवाज से मजा भी आ रहा था।
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