This story is part of the Drishyam series
हेल्लो दोस्तों, अब आगे की कहानी पढ़िए!
उधर जैसे ही अर्जुन दूकान से चाचाजी के घर पहुंचा लगभग उसी समय कालिया अपने भरे हुए ट्रक में सामान डिलीवरी करने के लिए दूकान पर पहुंचा। ट्रक की आवाज सुनकर सिम्मी बाहर आयी तो उसने कालिया को सामान उतारते हुए देखा। सिम्मी अकेली थी। वह कालिया को देख कर डर गयी। उसने दूकान के चारों और देखा। उसे दूर दूर तक कोई नजर नहीं आया।
कुछ नकली हिम्मत दिखाते हुए सिम्मी ने कालिया से पूछा, “इतने लेट क्यों सामान लाये हो? शामको आना। चाचाजी घर चले गए हैं।”
सिम्मी के मुंह से यह शब्द निकल तो गए पर बाद में उसे पछतावा होने लगा। शायद उसने ना चाहते हुए भी कालिया को यह मैसेज दे दिया की वह उस वक्त दूकान में अकेली ही थी और आसपास और कोई नजर नहीं आ रहा था। कालिया ने भी अपने चारों और नजर दौड़ाई। दूर दूर तक कोई नजर नहीं आ रहा था। सारी दुकानें बंद थीं। उस धुप में …