This story is part of the Utejna Sahas Aur Romanch Ke Vo Din series
मेरी निजी टिपण्णी – जब मेरी यह कहानी अभी चल ही रही थी तब मुझे मेरी एक महिला पाठक, जिनका डिजिटल नाम “चंचल चंचु” है, उन्होंने मुझे सिर्फ एक लाइन का ईमेल लिखा।
“हाई, मैं एक ** साल की लड़की हूँ। मैं आपकी कहानी को बहुत पसंद करती हूँ। लिखने के लिए शुक्रिया।”
यह एक सीधा सादा ईमेल मेरे दिल को छू गया। इस एक लाइन में मेरी प्यारी पाठक ने कितना सारा लिख दिया। मैं ऐसे पाठकों के लिए ही लिखता हूँ। मैं ख़ास तौर से अपनी महिला पाठकों को यह कहना चाहता हूँ, की आप को भगवान् ने जो ह्रदय दिया है और उसमें जो भाव दिए हैं उनको मैं बार बार नमन करता हूँ।
हमारी माँ, बहन, बेटी, प्रियतमा, पत्नी, और कई रूप में आप हम नालायक पुरुषों को झेलतीं हैं और उनको ना सिर्फ जन्म देती हैं और लालन पालन करती हैं बल्कि उनको ढेर सारा प्यार देती हैं। आपके इस ऋण को हम पुरुष लोग कभी अदा नहीं कर सकते। आप के कारण ही हमारा जीवन सफल बना है।
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जम्मू स्टेशन से कैंप की और टैक्सी चला कर ले जाते हुए पुरे रास्ते …