This story is part of the Utejna Sahas Aur Romanch Ke Vo Din series
दोनों जवाँ बदन एक दूसरे की कामवासना में झुलस रहे थे। नीतू कुमार के मुंह की लार चूस चूस कर अपने मुंह में लेती रही। कुमार भी अपनी जीभ नीतू के मुंह में डाल कर उसे ऐसे अंदर बाहर करने लगा जैसे वह नीतू के मुंह को अपनी जीभ से चोद रहा हो।
इस तरह काफी देर तक चिपके रहने के बाद नीतू ने काफी मशक्कत कर अपना सर कुमार से अलग किया और बोली, “कुमार! चलो भी! अब तो खुश हो ना? अब बहोत हो गया। अब प्लीज जाओ और आराम करो। मेरी कसम अब और कुछ शरारत की तो!”
कुमार ने कहा, “ठीक है तुमने कसम दी है तो सो जाऊंगा। पर ऐसे नहीं मानूंगा। पहले यह वचन दो की रात को सब सो जाएंगे उसके बाद तुम चुपचाप मेरी बर्थ पर निचे मेरे पास आ जाओगी।”
नीतू ने कुमार को दूर करते हुए कहा, “ठीक है बाबा देखूंगी। पर अब तो छोडो।”
कुमार ने जिद करते हुए कहा, “ना, मैं नहीं छोडूंगा। जब तक तुम मुझे वचन नहीं दोगी।”
नीतू ने दोनों हाथ जोड़ते हुए कहा, “ठीक है …