This story is part of the Utejna Sahas Aur Romanch Ke Vo Din series
सुनीलजी और जस्सूजी मर्दों को कपडे बदलने के रूम में चले गए। पर झरने के पास पहुँचते ही सुनीता जनाना कपडे बदलने के कमरे के बाहर रूक गयी और कुछ असमंजस में पड़ गयी। ज्योतिजी ने सुनीता की और देखा और बोली, “क्या बात है सुनीता? तुम रुक क्यों गयी?”
सुनीता ज्योतिजी के पास जाकर बोली, “ज्योतिजी, मेरा तैरने वाला ड्रेस इतना छोटा है। सुनीलजी ने मेरे लिए इतना छोटा कॉस्च्यूम खरीदा था की मुझे उसको पहन कर जस्सूजी के सामने आने में बड़ी शर्म आएगी। मैं नहाने नहीं आ रही। आप लोग नहाइये। मैं यहां बैठी आपको देखती रहूंगी। और फिर दीदी मुझे तैरना भी तो आता नहीं है।”
ज्योति जी ने सुनीता की बाहें पकड कर कहा, “अरे चल री! अब ज्यादा तमाशा ना कर! तूने ही सबको यहां नहाने के लिए आनेको तैयार किया और अब तू ही नखरे दिखा रही है? देख तूने मुझसे वादा किया था, की तू मेरे पति जस्सूजी से कोई पर्दा नहीं करेगी…
किया था की नहीं? याद कर तुम जब मेरी मालिश करने आयी थी तब? तूने कहा था की तुम मेरे पति से मालिश नहीं करवा सकती क्यूंकि तूने तुम्हारी माँ को वचन दिया था। पर तूने यह भी वादा किया था की तुम बाकी कोई भी पर्दा नहीं करेगी? कहा था ना…?
और जहां तक …