मैं चूत में अपनी दो उंगली डालकर भाभी की चुदाई करने लगा. उसे समझ नहीं आ रहा था कि वो मेरा लौड़ा चूसने का आनन्द ले या फिर उंगली से चोदन का मजा ले.
अब तक भाभी की चुदाई की मेरी इस सेक्स स्टोरी के पहले भागअनजान भाभी की चुदाई उसी के घर में-1में आपने पढ़ा कि एक अनजान विवाहित महिला कुसुम के साथ मेरे शारीरिक हरकतें रंग लाने लगी थीं.
मैं इस वक्त कैब में उसके साथ उसको सहलाते मसलते हुए गर्म कर रहा था.
अब आगे:
मुझे समझ आ रहा था कि उसकी चुत गीली हो चुकी है. मगर जैसे ही मैंने उसकी पैंटी के साइड से अपनी उंगली अन्दर करने की कोशिश की, उसने चुम्बन तोड़ते हुए मेरे दोनों हाथों को बाहर खींचा और मेरे ऊपर से हट गयी.
मुझे समझ नहीं आया कि उसने ऐसा क्यों किया मगर मैंने उम्मीद न खोते हुए एक बार फिर प्रयास करना शुरू किया.
वो मेरे बगल में बैठी थी, तो सबसे पहले मैंने बाएं हाथ से उसके बाल फिर सहलाने शुरू किए और लटों को पीछे करने लगा. उसकी आंखें बंद होते ही मैं मुड़कर उसके गले पर किस करने लगा. साथ ही मैंने अपने हाथ वापस से उसके मम्मों पर रख दिया और उन्हें सहलाने लगा.इस बार मैंने थोड़ी और हिम्मत करके अपना हाथ उसके ड्रेस के ऊपर साइड से अन्दर ले जाने की कोशिश करने लगा.
उसने मुझे मना किया और मेरा हाथ अलग करते हुए मुझसे कहा- मेरी सोसाइटी आ चुकी है, अब अलग होकर बैठ जाओ.
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