इस देसी हिन्दी स्टोरी के पिछले भागो में आपने पढ़ा कि एक औलाद पाने के लिए हम पति पत्नी ने साजिश का पहला जाल बुना और एक शिकार को फंसाया।
फिर जब हमने दूसरा जाल फैलाया तो कही न कही मैं खुद ही फंस गयी और लेने के देने पड़ गए। हालांकि हमारा प्लान दोनों बार कामयाब रहा, पर कुछ दिनों तक बदन में बहुत दर्द रहा।
प्रैग्नैंसी टेस्ट तो चार पांच हफ्तों से पहले हो नहीं सकता था, इस बीच हम इंतज़ार करें या एक बार और साजिश करके किसी को फंसाया जाए ये निश्चित नहीं कर पा रहे थे।
मेरे शरीर के साथ रौनक और संदीप ने जैसे मजे लिए थे और जो मेरे साथ बीता इसके बाद मेरी तो हिम्मत नहीं हो रही थी।
इस बीच मेरे ससुराल से फ़ोन आया कि घर में एक फंक्शन हैं तो छुट्टी लेकर आ जाओ। ट्रैन के टिकट नहीं मिल रहे थे। दोनों शहरो के बीच ओवरनाइट स्लीपर बस की सर्विस थी, तो पति ने एक डबल स्लीपर बुक करवा दिया। इन चार पांच दिनों में मेरा दर्द धीरे धीरे कम पड़ते हुए ख़त्म हो गया था और मैं सामान्य होती जा रही थी।
अगले दिन होम टाउन जाना था और शाम को पति ने आकर बताया कि आज रंजन का फ़ोन आया था। रंजन मेरे पति का दूर के रिश्ते में भाई लगता हैं।
मैं शादी के पहले से उसको जानती थी, क्यों कि स्कूल में मेरी क्लास में ही पढता था। उसका घर …