देसी गाँव की चूत चोदी मैंने! मैं ससुराल ले गाँव में घूम रहा था कि मैंने अपने मुनीम को एक भाभी से कर्ज का तकादा करते देखा. मैंने मुनीम को भेज दिया और भाभी से कर्ज वसूल लिया.
दोस्तो, मैं विशु राजे.आपने मेरी एक सेक्स कहानीठाकुर ने ससुराल में की मस्तीमें पढ़ा था कि कैसे ठाकुर ने यानि मैंने पूनम को कली से फूल बनाया.
अब आगे देसी गाँव की चूत चोदी:
पूनम की चूत फाड़ कर मैं हवेली लौटा.
तभी हवेली के पीछे वाली कोठरी में से कुछ आवाज सुनाई दी मुझे.मैं उधर जाने लगा देखने कि क्या बात है.उधर ही चम्पा की कोठरी भी थी.
उधर किसी की धोती कोने में हिलती हुई दिखाई दी.मैंने वहां जाकर देखा, तो मुनीम गांव की उसी बुढ़िया की बहू को बांहों में लेने की जबरदस्ती कोशिश कर रहा था, जिसका कर्जा बाकी था.
पर वह उसे पीछे धकेल रही थी.
तभी मैं वहां पहुंच गया और मुनीम का गिरेबान पकड़ कर बोला- ये क्या हो रहा है?मुनीम घबरा गया और बोला- कुछ नहीं मालिक … ये कर्जा नहीं दे रही थी. मैं इससे कर्जा वसूल कर रहा था.
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