This story is part of the Utejna Sahas Aur Romanch Ke Vo Din series
हमें अब तक की कहानी से दो सिख मिलती है। पहली यह की हम ने देखा की कामवासना की ज्वाला मैं कैसे कैसे नामी और अच्छे ओहदे पर बैठे साहबान भी झुलस सकते हैं। कई बार उन्हें सही या गलत का ख्याल नहीं रहता।
ट्रैन में जस्सूजी को उकसाने में कुछ हद तक सुनीता का हाथ जरूर था, पर अगर किसी ने यह देख लिया होता और सबके सामने जाहिर कर दिया होता की जस्सूजी जैसे बड़े ही सम्मानित और जाने माने देश भक्त आर्मी के अफसर किसी और की बीबी के बिस्तर में जा कर उसके साथ भद्दी हालात में पाए गए, तो उनकी क्या इज्जत रह जाती?
चाहे बड़ा ही गणमान्य हो या हमारे जैसा आम व्यक्ति हो, अगर उस की जाँघों के बिच का लण्ड या चूत सक्रीय है तो वह कोई भी खूबसूरत सेक्सी स्त्री या पुरुष की और आकर्षित होना स्वाभाविक है। यह कुदरत का नियम है।
उसमें भी यदि उन्हें कोई ऐसी स्त्री या पुरुष मिल जाए जो उनकी काम क्रीड़ा में साथ देने में इंटरेस्टेड हो तो कुछ ना कुछ कहानी बन ही जाती है।
पर यहां यह ख़ास तौर से गणमान्य व्यक्तियों को चाहिए की ऐसी कोई पारस्परिक सहमति से स्त्रीपुरुष की काम क्रीड़ा हो तो भी लोगों की नजरों से दूर बंद दरवाजे में हो वही बेहतर है। टिका टिपण्णी अथवा बदनामी करने वालों की कोई कमी नहीं है।
दूसरी बात यह की सबसे पहले तो यह …