दोस्तो, यह कहानी मुझे मेरे एक पाठक ने भेजी है। मैंने उनसे पूछकर इस कहानी को थोड़ा और रोचक बनाया है, लीजिये पढ़िये।
मेरा नाम रत्न लाल है, और मेरी उम्र इस वक्त 50 साल की है। मैं मेरी पत्नी और मेरा बेटा बस यही मेरा परिवार है।आपने मेरी पिछली कहानी के दो भागोंबीवी की सहेली पे दिल आ गया-1बीवी की सहेली पे दिल आ गया-2में पढ़ा कि अभी कुछ समय पहले मेरी पत्नी की एक सहेली रूपा मेरे साथ खुलने लगी, वो मुझे जीजाजी कह कर हंसी मज़ाक करने लगी तो मैंने मौक़ा ताड़ कर रूपा को चोद दिया और उसके बाद हमारे नाजायज रिश्ता आगे बढ़ा।
रूपा के घर में मेरी हैसियत उसके पति की ही है, आज भी है। रूपा की दोनों बेटियाँ मुझे ही पापा कहती हैं, उन सबकी हर एक ज़रूरत को मैं पूरी ज़िम्मेदारी से निभाता हूँ।
बढ़ते बढ़ते प्रेम इतना बढ़ा कि मैं खुद भूल गया कि मेरे सिर्फ एक बेटा है. मैंने उन दोनों लड़कियों को भी बाप …