This story is part of the Drishyam, ek chudai ki kahani series
कहाँ ले चले हो बता दो मुसाफिर,सितारों से आगे यह कैसा जहां है?”
आरती की समझ में यह नहीं आ रहा था की मैं और उसका पति अर्जुन उसे कौनसी कामुकता की नयी दुनिया में ले जा रहे थे और वह दुनिया कैसी होगी? क्या सितारों से आगे बादलों से छायी नयी चमक धमक सी दिखाई देने वाली यह दुनिया में कहीं ऐसा तो कुछ नहीं होगा की इंसान गिर जाए तो अचानक जमीन पर औंधे मुंह गिर पड़े?
दुविधा और घभराहट की गुत्थमगुत्थी वाली परिस्थिति में फँसी हुई आरती का हमारी इस चैट के दो तीन दिन बाद मुझे मेसेज आया। वह काफी व्यग्र और बेचैन सी लग रही थी। उसने लिखा, “अंकल, जैसे ही मैंने रमेशजी से कहा की मैं उनकी बात पर गौर करुँगी, यह पढ़ते ही, रमेशजी ने कहा उन्हें कुछ जरुरी काम करने हैं और वह जल्द ही चैट करने वापस आएंगे यह कह कर कनेक्शन काट दिया…
फिर दूसरे दिन तो जैसे मैंने उनसे गौर करने के लिए नहीं, शादी करने के लिए हाँ कह दी हो वैसे खुश हो कर हमारी आगे की जिंदगी की प्लानिंग करने लग गए। उन्होंने मुझे कहा की उन्होंने अपने सारे कुटुम्बी जनों, उनके …