This story is part of the अगर मुझसे मोहब्बत है series
करूंगा ख्वाहिशें तेरी पूरी मैं तुझ को पाने को।
नहीं छोडूंगा मैं तुझ को भले छोडूं जमाने को।
रहेगी होके तू मेरी चुदायेगी तू जब मुझसे
चुदेग़ी ऐसे तगड़ी के ना होगी दूर तब मुझ से।
रीता मेरी बात सुन कर कुछ परेशान हो कर बोली, “ठीक है। मैं भी जानती हूं कि ऐसी पार्टियों में ऐसा कुछ तो चलता रहता है। मैं मानती हूं की वह अच्छे दोस्त हैं। अच्छे दोस्त मुश्किल से मिलते हैं। किरण और सूरज अच्छे लोग है, हालांकि थोड़े पागल जरूर हैं। मैं भी इनसे बिगाड़ना थोड़े ही चाहती हूं? इसीलिए किरण और उसके पति सूरज के इस तरह के पागलपन को झेल रही हूं ना?
मैं कोई शिकायत नहीं कर रही। पर अगर हम बर्थडे मनाएंगे तो उनको अच्छा खाना खिलाना पड़ेगा। फिर तो मेरी तो रसोई में ही ड्यूटी लग जायेगी। मैं फिर आप लोगों के साथ बैठ नहीं पाउंगी।”
जब मैंने सूरज को यह कहा तो सूरज बोला, “ऐसा नहीं होगा। रीता को हमारे साथ ही बैठना होगा। रीता खाना बनाने के चक्कर में रसोई में ना फसी रहे इसका इंतजाम मैंने पहले से ही कर रखा है। रीता …