कॉलेज की पढ़ाई के लिए मैं दिल्ली गयी तो मुझे उस शहर की हवा लगी, मेरी रंगत बदल गयी. मेरी खिलती जवानी को पानी की तलाश थी जो मैंने अपने ही घर में ढूंढ लिया.
मेरा नाम रेशमा है. मैं बिहार के दरभंगा की रहने वाली हूं. मेरे पिता जी बिहार में ही सरकारी अफसर हैं इसलिए घर में खूब ऐश आराम है. जुबान पर आने से पहले ही हमारी इच्छा पूरी हो जाया करती है. मेरी मां भी मॉडर्न खयालों की है और उनको भी सजने संवरने का काफी शौक है.
मैं अपने घर में अपने माता पिता की एकलौती औलाद हूं इसलिए मेरे लिए किसी बात की मनाही नहीं है. जब बाहरवीं के बाद मैंने बड़े शहर में पढ़ाई करने की बात कही तो मेरे माता पिता ने तुरंत हां कर दी. चूंकि हमारे घर में पैसा बहुत है इसलिए रहने खाने का खर्च बीच में आने का सवाल ही नहीं था.
मैंने दिल्ली में एडमिशन के लिए कहा तो पापा अपने दोस्त से बात कर ली. पापा के दोस्त ने मेरा एडमिशन दिल्ली के एक नामी कॉलेज में करवा दिया. मुझे बहुत खुशी हुई. मैंने दिल्ली के बारे में अपनी दोस्तों से बहुत सुना था इसलिए मैं काफी उत्साहित थी वहां पर रहने के लिए.
चूंकि मैं एक लड़की थी और दूसरे राज्य की रहने वाली थी इसलिए हॉस्टल भी जल्दी ही मिल गया. पापा मुझे हॉस्टल में छोड़ने आये और एक दिन बाद वापस चले गये. मैं शहर में नयी थी और दिल्ली के माहौल से परिचित नहीं थी इसलिए ज्यादा किसी से बात नहीं कर पाती थी.
मगर जैसे जैसे मेरी जान-पहचान हॉस्टल की दूसरी लड़कियों से होती गयी तो मैं भी उस माहौल में धीरे धीरे ढलना शुरू हो गयी. अब मेरी रूम मेट …