दोस्तों आब आगे मेरी और मनी की इस कहानी में क्या होता है वो पढ़िए और मजे करिए..
मनी – चलो मेरा घर यही पास में ही है। वहां बैठकर गप्पे मारेंगे।
अजय – नही यार, फेर कभी सही। आज के लिए इतना ही काफी है।
मनी – ओके, जैसी आपकी इच्छा! लेकिन जाते जाते मुझे घर तक तो छोड़ दोगे या वो भी नही।
अजय – चलो, ठीक है बैठो बाइक पे चलते है।
दोनों बाइक पे होटल से मनी के घर की तरफ रवाना हो गए। मनी के गोल गोल मम्मे उसकी पीठ पर लगकर एक अलग ही मज़ा दे रहे थे। अजय भी मज़ा लेने की खातिर बार बार ब्रेक लगाकर मनी के मम्मो को अपनी पीठ पर महसूस कर रहा था। दोनों हँसते खेलते जा रहे थे।
करीब 10 मिनट के सफर के बाद मनी का घर आ गया। मनी ने निचे उतरते हुए अजय को अंदर आने का न्योता दिया। उधर अजय भी न चाहते हुए मना न कर पाया। मनी ने गली वाले गेट का ताला खोला और बाइक भी अंदर कर ली।
अजय – तुम तो बोल रही थी के साथ में तुम्हारा पति भी है। लेकिन घर तो बन्द पड़ा था। वो कहाँ है ?
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