This story is part of the Aakhiri Dagar, Purane Humsafar series
जोसफ से शादी के बाद मैं उसके बच्चे की माँ बन चुकी थी और मेरी खुशिया लौट आयी थी। अब मैं राहुल से मिलकर उसकी खुशहाल ज़िंदगी का भी जायजा लेना चाहती थी ।
पहली बार इतने लंबे अंतराल के बाद राहुल से मिलने जा रही थी। जिस तरह हम अलग हुए थे और उसने मुझे जिस हालत में गैर मर्द के साथ पकड़ा था, उसके बाद पता नहीं वो मुझसे मिलना पसंद भी करेगा या नहीं। ख़ास तौर से क्युकी अब उसकी शादी हो चुकी थी तो शायद मुझे पहले की तरह ना मिले। फिर भी मुझे अपने मन की शान्ति के लिए उस से मिलना था।
हालांकि मै उसको रिझाने नहीं जा रही थी पर फिर भी मैंने उसके पसंद के कलर की साड़ी पहनी. उसको मेरे पीठ से ज्यादा खुले ब्लाउज पसंद हैं तो मै वैसे ही ब्लाउज रखती रही हूँ.
मैने चमकीले बोर्डर वाली काली साड़ी और उस के साथ सिल्वर कलर का स्लीवलैस ब्लाउज पहना, जिसमे से मेरी पीठ लगभग नंगी दिख रही थी।
पेटीकोट भी मैंने उसकी पसंद के हिसाब से नाभी के 3-4 इंच नीचे बाँधा, पर फिर सोचा यह ज्यादा हो जायेगा तो 2 इंच नीचे बांध दिया। मेरा आधा पतला गौरा पेट फिर भी काफी अच्छे से दिखता हुआ लूभा रहा था।
मै जिसकी तरह बन संवर कर तैयार हो रही थी मुझे लग नहीं रहा था कि …