हॉट जवानी की कहानी में पढ़ें कि मैंने चूत की आग अपने हाथ से बुझाने का इंतजाम कर लिया. गद्दे पर लेट साड़ी ऊपर करके मैंने चूत में उंगली डाली. परन्तु …
इस हॉट जवानी की कहानी के पिछले भागअब और न तरसूंगी- 2में आपने पढ़ा कि
रूचि की विदाई के बाद दोपहर तक घर का माहौल गंभीर सा बना रहा और शादी की बातें ही चलती रहीं.शाम होते होते सब पहले की तरह सामान्य हो गया.
अब आगे की हॉट जवानी की कहानी:
काफी मेहमान तो विदाई के बाद जा चुके थे लेकिन ख़ास ख़ास मेहमान अभी भी बहुत सारे थे जिन्हें सोमवार को कथा के बाद ही जाना था.मैं सबसे बतियाते गप्पें हांकते टाइम पास कर रही थी मुझे तो बस इंतज़ार था कि मैं कैसे जल्दी से ऊपर कमरे में जा पहुंचूं और फिर पूरी नंगी होकर अपनी योनि की कस कर खबर लूं.
रात के ग्यारह बज गए थे, मेरी सास की उमर की कुछ लेडीज अभी भी बातों में लगीं थीं.हे भगवान् कितनी बातें करती हैं ये लोग? मैंने सोचा.
फिर मैंने घर का एक चक्कर लगाया तो एक कमरे में कुछ लोगों का पीना पिलाना चल रहा था, शराब की गंध कमरे के बाहर तक आ रही थी और रूचि के पापा यानि कि मेरे मौसा जी की बहकी बहकी बातें बाहर तक सुनाई दे रहीं थीं.मैं खीज रही थी …