माँ की चुदाई की कहानी में पढ़ें कि एक दिन अल सुबह मैंने अम्मी को बरामदे में कपड़े उतारते देखा. वो अधनंगी होकर लेट गयी. अब्बू के आने का वक्त था.
हैलो फ्रेंड्स, मैं असगर एक बार फिर से आपको अपनी माँ की चुदाई की कहानी के दरिया में डुबकी लगवाने आ गया हूँ.
कहानी के पहले भागकामुक अम्मी अब्बू की मस्त चुदाई- 1में अब तक आपने पढ़ा था कि मैं बाहर से देख रहा था कि अम्मी अब्बू नंगे चिपके हुए थे. मेरी अम्मी अब्बू से कह रही थीं कि मुझे छेड़ो मत वरना पूरा निचोड़ कर रख दूंगी. इस पर अब्बू हंसने लगे और साथ में अम्मी भी हंस दीं.
अब आगे की माँ की चुदाई की कहानी:
फिर अम्मी उठीं और बोलीं- अब उठने दो … सुबह हो गयी.
अब्बू ने अपने हाथ खोल दिए और अम्मी उठ गईं. उन्होंने ब्रा-पैटी पेटीकोट ब्लाउज पहन लिया.
उस समय मैंने अम्मी की चूत भी देखी थी. मैं ये तो समझ गया था कि अम्मी की चूत का साइज बड़ा है और हल्की से मांसल है, मगर झांटों के बाल बड़े होने के कारण यह नहीं देख पाया कि काली चूत है या गुलाबी.
उधर अब्बू के भी लंड पर बाल थे.
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