This story is part of the Utejna Sahas Aur Romanch Ke Vo Din series
जब सुनीता कर्नल साहब के साथ चाय लेकर मुस्काती हुई ड्राइंग रूम में वापस आयी तो उसे मुस्काती देख कर सुनील को यकीन ही नहीं हुआ की यह वही उसकी पत्नी सुनीता थी जो चंद मिनट पहले अपना रोना रोक ही नहीं पा रही थी।
सुनील ने कर्नल साहब की और मुड़ कर कहा, “कर्नल साहब, आपने सुनीता पर क्या जादू कर दिया? मुझे यकीन ही नहीं होता की आपने कैसे सुनीता को मुस्काना सीखा दिया। मैं आपका बहुत बहुत शुक्र गुजार हूँ। सुनीता को मुस्कराना सीखा कर आज आपने मेरी जिंदगी में नया रंग भर दिया है। आपने तो मेरी बिगड़ी हुई जिंदगी बना दी मेरी परेशानी दूर करदी।”
कर्नल साहब ने हंस कर कहा, “सुनील भाई, मैंने सुनीता को हँसता कर दिया है इसका मतलब यह नहीं की आप उस पर अचानक ही चालु हो जाओ। रात को उसे ज्यादा परेशान मत करना। उसे थोड़ा आराम करने देना।”
कर्नल साहब की बात सुनकर सुनील हँस पड़ा। सुनील की पत्नी सुनीता शर्म से अपना मुंह चुनरी में छुपाती हुई रसोई की और भागते हुए बोली, “जस्सूजी अब बस भी कीजिये। मेरी ज्यादा खिचाई मत करिये।”
इसके काफी दिनों तक कर्नल साहब कहीं बाहर दौरे पर चले गए। उनकी और सुनील की मुलाकात नहीं हो पायी। इस बिच सुनीता ने बी.एड. का फॉर्म भरा।
सुनीता की सारे विषयों में बड़ी अच्छी तैयारी थी पर उसे गणित में बहुत दिक्कत हो रही थी। सुनीता …